शनिवार, 10 सितंबर 2016

जरूर पढ़े मित्रों ....devdilki

1) अगर लगातार दौडने से लक्ष्मी मिलती तो,
    आज कुत्ता लक्ष्मीपति होता.....
2) मौत रिश्वत नही लेती लेकिन,
    रिश्वत मौत ले लेती है.....
3)काम मेँ ईश्वर का साथ मांगो लेकिन,
   ईश्वर काम कर दे ऐसा मत मांगो......
4) कडवा सत्य एक गरीब पेट के लिए सुबह
    जल्दी उठकर दोडता है और एक अमीर पेट
    कम करने के लिए सुबह जल्दी उठकर
    दौडता है..
5) 50 रुपे मेँ 1 लीटर कोल्डंड्रीक आती है..
    जिसमे स्वाद और पोषण जीरो.. और
    कमाता कौन? मल्टीनेशनल कम्पनिया और
    उसके सामने 50 रुपे मे 1 किलो फल आते
    है स्वाद भरपुर और पोषण लाजवाब और
    कमाता कौन? धुप मेँ,सर्दी मेँ,बरसात मेँ
    लारी लेकर घुमता अपना एक गरीब
    भारतवासी..
6) सबंध भले थोडा रखो लेकिन,एसा रखो
    कि शरम किसी की झेलनी ना पडे मौत
    के मुह से जिदंगी बरस पडे और मरने
    के बाद शमशान की राख भी रो पडे..
7) जब तालाब भरता है तब,मछलीया
    चीटीँयो को खाती है और जब तालाब
    खाली होता है तब चीटींया मछलियो
    को खाती है, मौका सबको मिलता है
    बस अपनी बारी का इन्तजार करो..
8)दुनिया मेँ दो तरह के लोग होते है.. एक
   जो दुसरो का नाम याद रखते है और
   दुसरा जिसका नाम दुसरे याद रखते है..
9) सुख मेँ सुखी हो तो दु:ख भोगना सिखो
    जिसको खबर नही दु:ख की तो सुख
    का क्या मजा.?
10) जीवन मेँ कुछ बडा मिल जाए तो छोटे
      को मत भुलना.. क्योकिँ जहा सुई काम
      हो वहा तलवार काम नही आती..
11) माँ-बाप का दिल दुखाकर आजतक
      दुनिया मेँ कोई सुखी नही हुआ..
12) भगवान का उपकार है कि आँसुऔ को रंग
      नही दिया वरना रात को भींगा तकिया सवेरे
      कुछ ना कुछ भैद खोल देता..
13) जो इंसान प्रेम मेँ निष्फल होता है
      वो जिदगी मे सफल होता है..
14) आज करे कल कर कल करे
      सो परसो ईतनी भी क्या जल्दी है जब
     जीना है बरसो..
15) दुनिया का सबसे कीमती प्रवाही
      कौनसा है? आँसु जिसमेँ 1%पानी
      और 99% भावनाए होती है..
16) दुनिया का सबसे अमीर आदमी भी
      माँ के. बिना गरीब है..
17) गुस्से मे आदमी कभी कभी व्यर्थ बाते
      करता है, तो कभी मन की बात भी
      बोल देता है..
18) भगवान खडा है तुझे सब कुछ देने के
      लिए लेकिन तु चम्मच लेकर खडा है
      पुरा सागर माँगने के लिए..
19) आप यह पोस्ट पढ रहे
      हो ईसका असतित्व
      आप के माँ बाप है...

शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

SAMAJIK SAMRASTA WRITTEN BY NAMO..

नरेंद्र मोदी के विचारशील व चिंतनपरख लेखों का संकलन


अंग्रेजों ने हिन्दुत्व को, राष्ट्रीयत्व को क्षीण करने का षड्यंत्र रचा, जिसे डॉ. बाबा साहब अंबेडकरजी ने समझा और समाज में आयी बुराइयों को दूर करने का बीड़ा उठाया। वंचित वर्ग में प्रेरणा जगाकर उसमें ऊपर उठने की ललक जगाई। उसी प्रकार गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी समाज में व्याप्त दुःख और अभावों को दूर करने का संकल्प लिया। उन्होंने समरस समाज के विचार को प्रतिष्ठित करने का सत्प्रयास किया। समाज के विविध प्रश्नों को देखने का उनका अपना ही दृष्टिकोण है। नरेंद्र मोदी की समाज के प्रति जो संवेदना है, वंचितों के प्रति जो कर्त्तव्य भाव है और सामाजिक समरसता के लिए जो प्रतिबद्धता है, वह उनके भाषणों में, उनके लेखों में तथा उनके कार्य में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

किसी भी राज्य के संपूर्ण विकास का मापन राज्य के वंचितों-पीड़ितों के विकास (कष्ट निवारण) के आधार पर होता है। सच्चा सर्वांगीण विकास वही है, जिसमें अंतिम छोर में निवास करने वाले छोटे-से-छोटे आम आदमी तक विकास का फल पहुँचे। श्री नरेंद्र मोदी के शासन का अधिष्ठान ऐसा ही ‘कल्याणकारी राज्य’ रहा है। उनके जीवन-कार्य का केंद्रबिंदु भी समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा सामान्य आदमी ही है।

यह पुस्तक नरेंद्र मोदी के विचारशील व चिंतनपरख लेखों का संकलन है। इसमें आमजन के प्रति उनके ममत्व भाव, सुख-दुःख में सहभागिता तथा विचार-चिंतन की श्रेष्ठता, समाज के प्रति संवेदना एवं सामाजिक समरसता के प्रति वचनबद्धता को साक्षात् अनुभव किया जा सकता है।

श्री किशोर मकवाना द्वारा इन सब लेखों को संकलित कर पाठकों के लिए प्रस्तुत करने का प्रयास अभिनंदनीय है। विश्वास है कि यह पुस्तक समरसता के क्षेत्र में कार्यरत बंधुओं के मन में आत्मविश्वास जगाकर समाज में सामाजिक समरसता का भाव दृढ़ करने में प्रेरणा जगाएगी।

शनिवार, 3 सितंबर 2016

जीएसटी : एक नजर में

Ø जी एस टी : एक नज़र में
Ø G S T – Goods and Services  Tax
·         यह एक अप्रत्यक्ष कर हैं इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान कर लगाया जाता हैं
·         जीएसटी एक वैट है जो दो स्तरों पर लगेगा, एक केंद्रीय स्तर का और दूसरा राज्य  स्तर का ।
·         मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित गुड्स एवं सर्विसेज टैक्स 1947 के बाद का सबसे बड़ा टैक्स रिफोर्म है ।
·         वर्ष 2011 में पेश किये गये पहले विधेयक में एक सर्वव्यापी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई का प्रावधान नहीं था । वर्तमान विधेयक में राज्यों को पांच साल तक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है ।
·         मूल विधेयक 2011 के प्रभाव से पेट्रोलियम उत्पादों एवं शराब को बाहर रखा गया था । संशोधित विधेयक में पेट्रोलियम उत्पादों और शराब के साथ तम्बाकू को भी प्रभाव से बाहर रखा गया है ।
·         संशोधित विधेयक में पांच साल एक फीसदी अतिरिक्त कर लगाने का प्रावधान है इसका उपयोग राज्यों को अतिरिक्त मुआवजा देने के  लिए होगा ।

Ø जी एस टी के लाभ
·         सबसे अधिक फायदा आम आदमी को होगा । पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा ।
·         पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक रहेगी - जैसे अभी आप कोई कार दिल्ली में खरीदते है या अन्य किसी राज्य से खरीदते हैं तो दोनों जगह से खरीदने पर सम्बंधित राज्य के टैक्स के अनुसार आपको कम या ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है । जी एस टी लागू होने के बाद  ऐसा नहीं होगा बल्कि सब राज्यों में समान कीमत हो जाएगी
·         कर विवाद में कमी – जी एस टी लागू होने से कर वसूली की प्रक्रिया में कर अधिकारियों द्वारा की जाने वाली हेरा-फेरी की सम्भावना कम हो जाएगी ।
·         सामान की कीमतें कम होगी जी एस टी लागू होने से राज्यों में  लगने वाला वैट, मनोरंजन कर, लक्जरी टैक्स, लोटरी टैक्स, एंट्री टैक्स, आदि समाप्त हो जायेंगे अभी सामान खरीदते समय लोगों को 30 – 35 फीसदी के लगभग कर चुकाना पड़ता है । जी एस टी लागू होने पर वो भी  20-25 फीसदी पर आ जाने की संभावना है
·         jएस टी से भारत की ग्रोथ रेट में भी एक से डेढ़ फ़ीसदी की बढ़ोतरी होगी ।
·         सामान देश में एक राज्य से दूसरे राज्य में बिना किसी टैक्स के परिवहन सकेंगे ।

Ø जी एस  टी : परिषद् (काउन्सिल)
1 . जी एस टी काउन्सिल चेयरमैन – केंद्रीय वित्त मंत्री
2 . केंद्र से अन्य सदस्यों में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री
3 . वाइस चेयरमैन – किसी भी एक राज्य का वित्त मंत्री
4 . सदस्य – राज्यों के वित्त मंत्री

Ø जी एस टी संविधान में
·         मूल विधेयक संविधान के 115वें संशोधन में हैं ।
·         संशोधित विधेयक को संविधान को संविधान के 122वें संशोधन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है ।
·         मूल विधेयक में विवाद का निपटारा सर्वोच्च न्यायलय से सेवानिवृत न्यायाधीश या अन्य राज्य के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठन का प्रावधान था
·         संशोधित विधेयक में जी एस टी परिषद् द्वारा ही विवाद निपटने की बात कहीं गयी है
·         मूल विधेयक में विवाद का निपटारा आम सहमति से लिए जाने की व्यवस्था थी जबकि संशोधित विधेयक में एक-चौथाई सदस्यों के समर्थन से भी फेसले लेने की व्यवस्था की गयी है ।
·         केन्द्र्य बिक्री कर (CST) खत्म हो जायेगा ।
·         प्रवेश शुल्क और चुंगी शुल्क भी ख़त्म हो जायेगा ।
·         सरकारी टैक्स वसूली की लगत  भी घट जाएगी ।

Ø जी एस टी पर मोदी के बयान
·       जी एस टी के कारण टैक्स सिस्टम काफी सरल हो सकेगा जो अलग अलग टैक्स सिस्टम है भी  ख़त्म हो जायेगा ।
·         जी एस टी का सबसे बड़ा सन्देश कंज्यूमर इज किंग जी एस टी से छोटे
·         कारोबारियों और  कंज्यूमर को सबसे ज्यादा लाभ होगा
·         जी एस टी से से छोटे उद्यमियों को सुरक्षित करने से देश को फायदा होगा
·         केंद्र और राज्यों में भरोसा करना बहुत जरुरी था जी एस टी की यात्रा में किसी ने इसको राजनितिक मंच नहीं बन्ने दिया सभी दलों ने राजनीती से ऊपर राष्ट्रनीति को रखा
·         एक भारत के भाव को ताकत देने  वाली माला में एक और मोती है जी एस टी
मूडीज के  अनुसार –
जी एस टी के प्रभावी क्रियान्वयन में लगने वाले समय को देखते हुए विधेयक का अल्पकालिक साख पर प्रभाव सीमित होगा । मध्यम अवधि में वस्तु एवं सेवाओं की सुचारू आवाजाही की बाधा को समाप्त कर तथा कंपनियों एवं सरकार की कर प्रशसान लागत में कटौती होगी । आर्थिक गतिविधियों को बढ़ने तथा राजस्व में वृद्धि में मददगार होगा इससे अनुपालन और कर प्राप्ति बढ़ेगी
·         अपनी रिपोर्ट में मूडीज ने कहा है कि नयी कर व्यवस्था गैर-वित्तीय भारतीय कंपनियों के लिए सकारात्मक होगी
·         हालांकि  विभिन्न क्षेत्रों पर इसका प्रभाव अलग अलग होगा ।

·         कुछ राज्यों को आंशिक नुकसान होने की आसार है जो उन्हें अतिरिक्त कर के रूप में प्राप्त होता था । लेकिन केंद्र सरकार द्वारा जी एस टी से प्राप्त आय का केंद्र एवं राज्य में निर्धारित जी एस टी दर का 50-50 फीसदी के अनुपात में बांटने का प्रावधान संशोधित विधेयक में किया गया है जैसे यदि जी एस टी 20 फीसदी रखा गया तो केंद्र : राज्य में 10:10 फ़ीसदी रहेगा ।

अंततः जी एस टी संघीय ढाँचे के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा । सबसे सकारात्मक पहलू इस बिल का यह है कि आम सहमति से पारित हुआ जिसे जो राजनीति से परे राष्ट्र नीति को दर्शाता है ।