Ø जी एस टी : एक नज़र में
Ø G S T – Goods and Services Tax
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यह एक अप्रत्यक्ष कर हैं इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक
समान कर लगाया जाता हैं ।
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जीएसटी एक वैट है जो दो स्तरों पर लगेगा, एक केंद्रीय स्तर का
और दूसरा राज्य स्तर का ।
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मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित गुड्स एवं सर्विसेज टैक्स 1947
के बाद का सबसे बड़ा टैक्स रिफोर्म है ।
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वर्ष 2011 में पेश किये गये पहले विधेयक में एक सर्वव्यापी
अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई का प्रावधान नहीं
था । वर्तमान विधेयक में राज्यों को पांच साल तक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया
है ।
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मूल विधेयक 2011 के प्रभाव से पेट्रोलियम उत्पादों एवं शराब
को बाहर रखा गया था । संशोधित विधेयक में पेट्रोलियम उत्पादों और शराब के साथ
तम्बाकू को भी प्रभाव से बाहर रखा गया है ।
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संशोधित विधेयक में पांच साल एक फीसदी अतिरिक्त कर लगाने का
प्रावधान है इसका उपयोग राज्यों को अतिरिक्त मुआवजा देने के लिए होगा ।
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जी एस टी के लाभ
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सबसे अधिक फायदा आम आदमी को होगा । पूरे देश में किसी भी
सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा ।
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पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक रहेगी - जैसे अभी आप कोई
कार दिल्ली में खरीदते है या अन्य किसी राज्य से खरीदते हैं तो दोनों जगह से
खरीदने पर सम्बंधित राज्य के टैक्स के अनुसार आपको कम या ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती
है । जी एस टी लागू होने के बाद ऐसा नहीं
होगा बल्कि सब राज्यों में समान कीमत हो जाएगी
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कर विवाद में कमी – जी एस टी लागू होने से कर वसूली की
प्रक्रिया में कर अधिकारियों द्वारा की जाने वाली हेरा-फेरी की सम्भावना कम हो
जाएगी ।
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सामान की कीमतें कम होगी जी एस टी लागू होने से राज्यों
में लगने वाला वैट, मनोरंजन कर, लक्जरी
टैक्स, लोटरी टैक्स, एंट्री टैक्स, आदि समाप्त हो जायेंगे अभी सामान खरीदते समय
लोगों को 30 – 35 फीसदी के लगभग कर चुकाना पड़ता है । जी एस टी लागू होने पर वो
भी 20-25 फीसदी पर आ जाने की संभावना है
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jएस टी से भारत की ग्रोथ रेट में भी एक से डेढ़ फ़ीसदी की
बढ़ोतरी होगी ।
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सामान देश में एक राज्य से दूसरे राज्य में बिना किसी टैक्स
के परिवहन सकेंगे ।
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जी एस टी : परिषद्
(काउन्सिल)
1 . जी एस टी काउन्सिल चेयरमैन – केंद्रीय वित्त
मंत्री
2 . केंद्र से अन्य सदस्यों में केंद्रीय वित्त राज्य
मंत्री
3 . वाइस चेयरमैन – किसी भी एक राज्य का वित्त मंत्री
4 . सदस्य – राज्यों के वित्त मंत्री
Ø
जी एस टी संविधान में
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मूल विधेयक संविधान के 115वें संशोधन में हैं ।
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संशोधित विधेयक को संविधान को संविधान के 122वें संशोधन के
रूप में सूचीबद्ध किया गया है ।
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मूल विधेयक में विवाद का निपटारा सर्वोच्च न्यायलय से
सेवानिवृत न्यायाधीश या अन्य राज्य के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठन
का प्रावधान था
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संशोधित विधेयक में जी एस टी परिषद् द्वारा ही विवाद निपटने
की बात कहीं गयी है
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मूल विधेयक में विवाद का निपटारा आम सहमति से लिए जाने की
व्यवस्था थी जबकि संशोधित विधेयक में एक-चौथाई सदस्यों के समर्थन से भी फेसले लेने
की व्यवस्था की गयी है ।
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केन्द्र्य बिक्री कर (CST) खत्म हो जायेगा ।
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प्रवेश शुल्क और चुंगी शुल्क भी ख़त्म हो जायेगा ।
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सरकारी टैक्स वसूली की लगत
भी घट जाएगी ।
Ø जी एस टी पर मोदी के बयान
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जी एस टी के कारण टैक्स सिस्टम काफी सरल हो सकेगा जो अलग अलग टैक्स
सिस्टम है भी ख़त्म हो जायेगा ।
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जी एस टी का सबसे बड़ा सन्देश कंज्यूमर इज किंग जी एस टी से
छोटे
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कारोबारियों और कंज्यूमर
को सबसे ज्यादा लाभ होगा
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जी एस टी से से छोटे उद्यमियों को सुरक्षित करने से देश को
फायदा होगा
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केंद्र और राज्यों में भरोसा करना बहुत जरुरी था जी एस टी की
यात्रा में किसी ने इसको राजनितिक मंच नहीं बन्ने दिया सभी दलों ने राजनीती से ऊपर
राष्ट्रनीति को रखा
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एक भारत के भाव को ताकत देने
वाली माला में एक और मोती है जी एस टी
मूडीज के अनुसार –
“जी एस टी के प्रभावी
क्रियान्वयन में लगने वाले समय को देखते हुए विधेयक का अल्पकालिक साख पर प्रभाव
सीमित होगा । मध्यम अवधि में वस्तु एवं सेवाओं की सुचारू आवाजाही की बाधा को
समाप्त कर तथा कंपनियों एवं सरकार की कर प्रशसान लागत में कटौती होगी । आर्थिक
गतिविधियों को बढ़ने तथा राजस्व में वृद्धि में मददगार होगा इससे अनुपालन और कर
प्राप्ति बढ़ेगी”
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अपनी रिपोर्ट में मूडीज ने कहा है कि नयी कर व्यवस्था गैर-वित्तीय
भारतीय कंपनियों के लिए सकारात्मक होगी
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हालांकि विभिन्न
क्षेत्रों पर इसका प्रभाव अलग अलग होगा ।
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कुछ राज्यों को आंशिक नुकसान होने की आसार है जो उन्हें
अतिरिक्त कर के रूप में प्राप्त होता था । लेकिन केंद्र सरकार द्वारा जी एस टी से
प्राप्त आय का केंद्र एवं राज्य में निर्धारित जी एस टी दर का 50-50 फीसदी के
अनुपात में बांटने का प्रावधान संशोधित विधेयक में किया गया है जैसे यदि जी एस टी
20 फीसदी रखा गया तो केंद्र : राज्य में 10:10 फ़ीसदी रहेगा ।
अंततः जी एस टी संघीय ढाँचे
के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा । सबसे सकारात्मक पहलू इस बिल का यह है कि आम
सहमति से पारित हुआ जिसे जो राजनीति से परे राष्ट्र नीति को दर्शाता है ।
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