जनता की बात......
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जनहित और देशहित में सभी विभागों के कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश, पेंशन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बिना राजनीतिक दबाव के कार्य की स्वतन्त्रता जरूरी है
लेकिन लोकतंत्र का दुर्भाग्य है देश में नमकहराम, दलबदलू अपराधी वंशवादी भ्रष्टाचारी नेताओं को भी अनाप-शनाप सुविधाएं, विशेषाधिकार, पेंशन भत्ता मनमाने तरीकों से प्राप्त करने का अधिकार है।
जनता के लिए सभी कानून कठोरता से लागू लेकिन राजनीतिक आतंकपरस्ती के चलते नेताओं को विशेषाधिकार यह स्थिति बहुत ही खतरनाक है
सबसे दुर्गति तो पढे लिखे लोग भी अनपढ़ नेताओं के लिए अपना जमीर ईमान नैतिकता मानवता सब बेच देते हैं।
लेकिन दिन-रात मेहनत करने वाले कर्मचारियों या अधिकारियों पर अनपढ गंवार लोग उनसे ऊपर मंत्री बनकर मंत्री बैठ जाते हैं। अपने राजनैतिक हीन चरित्र से व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। ऐसे लोगों से ही कर्मचारियों और अधिकारियों का कार्यबल और मनोबल कमजोर होता है।
जिससे आमजन का जीवन प्रभावित होता है।
राजनीतिक नेतृत्व का दोहरा चरित्र राजनीतिक आतंकवाद का पोषक है जिससे युवाओं में नकारात्मकता, असंतोष अपराधवृत्ति बढ रही है।
जो देश के भविष्य के लिए खतरनाक है
देशवासियों को राजनीतिक आतंकवाद से संघर्ष के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पडेगा। अंग्रेजों से घटिया सोच राजनीतिक आतंकवादियों की है।
दल और नेता से ऊपर
जनहित और देशहित प्राथमिकता हो।
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