मंगलवार, 7 मई 2024

स्वास्थ्य और जीवन के महत्त्वपूर्ण सूत्र

 *।।ऋषियों द्वारा दिए गए ज्ञान के, सुनहरे प्राचीन स्वास्थ्य सूत्र ।।*


*१. अजीर्णे भोजनं विषम् ।*

यदि पहले किया हुआ भोजन का पाचन न हुआ हो और दूसरा भोजन लिया जाए तो वह विष {जहर} के समान हो जाता है ।। भूख लगना एक संकेत है कि पिछला भोजन पच चुका, तो ही भोजन करें ।।

 

*२. अर्धरोगहरी निद्रा ।।*

अच्छी निद्रा से बहुत  सारे रोग {बीमारियां} अपने आप दूर हो जाती है ।।

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*३ मुद्गदाली गदव्याली ।।*

सभी दालों में से हरे मूंग की दाल सबसे अच्छी होती है ।।  यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है  अन्य सभी दालों के एक या दूसरे दुष्प्रभाव भी होते हैं ।।


*४. भग्नास्थि-संधानकरो लशुनः ।।*

लहसुन टूटी हुई हड्डियों को भी जोड़ देता है ।।

*५. अति सर्वत्र वर्जयेत् ।।*

किसी भी चीज का अत्यधिक सेवन,  इसलिए कि उसका स्वाद अच्छा है,

नही करें ।।

 *स्वास्थ्य के लिए यहअच्छा नहीं है ।। संयमित रहें ।।*


*६. नास्ति मूलमनौषधम् ।।*

ऐसी कोई {तरकारी} सब्जी नहीं है, जिसका शरीर को कोई औषधीय लाभ न हो ।।


*७.  न वैद्यः प्रभुरायुषः ।।*

कोई  वैद्य / डॉक्टर दीर्घायु देने में सक्षम नहीं है ।।

 (वैद्य /डॉक्टरों की भी सीमाएं हैं ।।

*आप अपने नियम संयम से ही दीर्घायु प्राप्त करते हैं ।।*


*८. चिंता व्याधि प्रकाशाय ।।*

चिंता ही जाने  से स्वास्थ्य बिगड़ता है ।।

*९. व्यायामश्च शनैः शनैः ।।*

कोई भी व्यायाम धीरे-धीरे करें ।।

तेज गति से व्यायाम या कार्डियो अच्छा नहीं है ।।


*१०. अजवत् चर्वणं  कुर्यात् ।।*

अपने भोजन को बकरी की की भाँति चबाएँ, कभी भी बहुत शीघ्रता से भोजन नही करें ।।

धीरे-धीरे भोजन करने से लार बनता है और वह पाचन क्रिया में सहायक होता है ।।


*११.  स्नानं नाम मनःप्रसाधनकरं  दुःस्वप्न-विध्वंसनम् ।।*

 नहाने से {डिप्रेशन} अवसाद दूर होता है ।।

 यह बुरे सपनों को दूर भगाता है ।।


*१२. न स्नानमाचरेद्  भुक्त्वा ।।*

भोजन के तुरंत बाद कभी भी नहाना नहीं चाहिए, क्योंकि पाचन तंत्र प्रभावित होता है ।।

 

*१३. नास्ति मेघसमं तोयम् ।।*

वर्षा के जल की शुद्धता से कोई भी जल का मेल नही ।।

 

*१४.  अजीर्णे भेषजं वारि ।।*

अपच होने पर सादा जल औषधि का काम करता है ।।


*१५. सर्वत्र नूतनं  शस्तं, सेवकान्ने पुरातने ।*

सदैव ताजी {सत्वर} चीजों को प्राथमिकता दें, परन्तु चावल और सेवक पुराने होने पर ही अच्छे होते हैं ।।

*१६. नित्यं सर्वा रसा भक्ष्याः ।।*

ऐसा भोजन करें जिसमें सभी छह प्रकार  के स्वाद हों ।।

*जैसे-- नमकीन, मीठा, कड़वा, खट्टा, कसैला और तीखा ।।*


*१७. जठरं पूरायेदर्धम् अन्नैर्, भागं जलेन च । वायोः संचरणार्थाय चतर्थमवशेषयेत् ।।*

अपना आधा पेट ठोस पदार्थों {भोजन} से भरें, एक चौथाई पेट पानी से और एक चौथाई इसे खाली रहने दें ।।

*१८. भुक्त्वा शतपथं गच्छेद् यदिच्छेत् चिरजीवितम् ।।*

यदि दीर्घ {लम्बा} जीवन जीना चाहते है तो, भोजन के बाद सौ कदम चले 

और फिर बाईं ओर करवट लेकर थोड़ी देर लेट जाएं ।।


*१९. क्षुत्साधुतां जनयति ।।*

भूख भोजन का स्वाद बढ़ा देती है ।।

इसलिए, भूख लगने पर ही भोजन करें ।।


*२०. चिंता जरा नाम मनुष्याणाम्।।*

चिंता करने से शीध्र आ जाता है बुढ़ापा ।।


*२१. शतं विहाय भोक्तव्यं, सहस्रं स्नानमाचरेत् ।।*

सौ काम छोड़ कर भोजन कर लेना चाहिए, 

और एक हजार काम छोड़कर स्नान कर लेना चाहिए ।।

 

*२२. सर्वधर्मेषु मध्यमाम्।।*

सदैव बीच का रास्ता चुनें ।

किसी भी चीज में अति करने से बचें

*भक्ष्य अभक्ष्य का सदैव ध्यान रखना चाहिए ।।*


*आप का दिन मंगलमय हो*🌷🌷

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